रामनगर वार्ड 80 से हिन्दुओं का पलायन: हिन्दुत्व की खोखली घोषणाएं और प्रशासनिक चुप्पी

"वर्ष में एक बार हिन्दू शोभायात्रा निकाल कर घर बैठ जाने वाले संगठन मौन क्यों धारण किए हुए हैं"

दिल्ली नगर निगम के रामनगर वार्ड 80 (बल्लीमारान विधानसभा क्षेत्र) में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तन और हिन्दू परिवारों के पलायन की कहानी आज कश्मीर,पश्चिम बंगाल या केरल के उन इलाकों की याद दिलाती है जहां एक समय हिन्दू बहुसंख्यक थे और आज नाम मात्र की उपस्थिति बची है अमरपुरी,प्रेमनगर,कच्चा रास्ता, चिन्योट बस्ती,सिद्धार्थ बस्ती,ऊंट घड़ा, किला पृथ्वीराज चौहान,लक्ष्मणपुरी जैसी बस्तियों में कभी जाटव,धानक, नायक,प्रजापति,वाल्मीकि,पंजाबी और बनिया समुदायों की मजबूत मौजूदगी थी इनमें धानक समाज जैसी हिन्दू बाहुल्य जातियां प्रमुख थीं आज इन क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी का क्रमिक और तेज विस्तार हो रहा है पहले एक परिवार आया,फिर दूसरे-तीसरे,और अब स्थिति यह है कि अधिकांश हिन्दू परिवार सुरक्षा सांस्कृतिक असहजता और सामाजिक दबाव के कारण पलायन कर चुके हैं या कर रहे हैं

नबी करीम क्षेत्र का प्राचीन मंदिर ढाई दशक से बंद और उपेक्षित

वार्ड में इन दिनों एक प्राचीन मंदिर विशेष चर्चा में है जो पिछले ढाई दशक (लगभग 25 वर्ष) से बंद पड़ा हुआ है इस मंदिर को अब फिर से खोलने या जीर्णोद्धार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है स्थानीय हिन्दू निवासी बताते हैं कि यह मंदिर एक समय धानक समाज की बस्ती के बीच था लेकिन आज उसके आसपास कूड़े के ढेर लगाए जा रहे हैं मांस-मछली फेंकी जाती है और मंदिर की अवस्था इतनी दयनीय हो गई है कि पूजा-पाठ लगभग असंभव हो गया है

यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि स्थानीय हिन्दू पहचान का प्रतीक था ढाई दशकों से इसे जानबूझकर उपेक्षित रखा गया है जबकि मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ नए-नए मस्जिदों का निर्माण नियम-कानूनों को ताक पर रखकर हो रहा है इस प्राचीन हिन्दू मंदिर को दोबारा सक्रिय करने में हर स्तर पर बाधाएं खड़ी की जा रही हैं यह दोहरे मापदंड का सबसे स्पष्ट उदाहरण है

राजनीतिक और संगठनात्मक विफलता

हिन्दुत्व के नाम पर रामनगर वार्ड 80 से भाजपा के टिकट पर एक युवा और उत्साही पार्षद चुने गए थे मतदाताओं ने हिन्दुत्व को प्राथमिकता देते हुए उन्हें समर्थन दिया हालांकि जीत का मार्जिन ज्यादा नहीं था लेकिन आज हिन्दू परिवार ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं पार्षद जी ने न तो इन जीर्ण-शीर्ण मंदिरों (सीताराम मंदिर, गली हनुमान मंदिर सहित इस 25 वर्ष से बंद पड़े प्राचीन मंदिर) की ओर ध्यान दिया न ही अवैध मस्जिद निर्माण या सड़क अतिक्रमण पर आवाज उठाई

थाना नबी करीम के पास बनी एक मस्जिद ने सड़क का आधा हिस्सा स्थायी रूप से घेर रखा है ताकि जुम्मे की नमाज में भीड़ होने पर सड़क पर नमाज पढ़ी जा सके इससे यातायात बार-बार जाम होता है लेकिन थानाध्यक्ष को यह अतिक्रमण “दिखाई” नहीं देता वहीं हिन्दू मंदिरों की मरम्मत या इस बंद पड़े मंदिर को खोलने के लिए पार्षद की चुप्पी साफ तौर पर दिख रही है

हिन्दुत्व वाले संगठन और नेता भी साल में एक बार भव्य शोभायात्रा निकालकर, नारेबाजी करके और सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर अपने कर्तव्य पूरा समझ लेते हैं उसके बाद वे अपने आरामदायक घरों में लौट जाते हैं किला पृथ्वीराज चौहान में शनि महाराज की मूर्ति स्थापना तक रोक दी गई जहां मुस्लिम विरोध के सामने पूरा प्रशासन खड़ा था लेकिन हिन्दुत्व के ठेकेदार कहां थे? आज जब वार्ड में एक प्राचीन मंदिर 25 साल से बंद है और उसके आगे कूड़ा डाला जा रहा है तब भी इन संगठनों की “सक्रियता” केवल बयानबाजी तक सीमित है हिन्दू परिवारों के पलायन को रोकने मंदिर संरक्षण या स्थानीय सुरक्षा के लिए कोई ठोस संघर्ष या निरंतर फॉलो-अप नहीं दिखता

बल्लीमारान विधानसभा में आज तक कोई हिन्दू विधायक नहीं बन सका

हिन्दू मतदाता विभाजित रहते हैं जबकि मुस्लिम मतदाता मुस्लिम उम्मीदवार को साम्प्रदायिक एकता के आधार पर वोट देते हैं विधायक इमरान हुसैन ने कब्रिस्तान की मरम्मत के लिए लाखों रुपये खर्च किए और एक पुराने यूरिनल को हटवा दिया लेकिन हिन्दू मंदिरों की दशा पर उनकी चुप्पी बोलती है

कारण, प्रभाव और चेतावनी

इस पलायन के पीछे उच्च जन्म दर,

प्रवासन सामाजिक दबाव,महिलाओं की सुरक्षा की चिंता और प्रशासनिक निष्क्रियता प्रमुख हैं बिल्डिंग विभाग एक गरीब हिन्दू के घर की पलस्तर पर तो तुरंत पहुंच जाता है लेकिन अवैध मस्जिद निर्माण पर आंखें मूंद लेता है

यदि समय रहते संज्ञान नहीं लिया गया तो रामनगर वार्ड 80 पूरी तरह हिन्दू-विहीन हो जाएगा बाकी बचे हिन्दू भी मजबूरन पलायन कर लेंगे फिर पार्षद भी मुस्लिम ही चुना जाएगा यह केवल एक वार्ड का मुद्दा नहीं है यह “लैंड जिहाद” या जनसांख्यिकीय असंतुलन का हिस्सा है जो दिल्ली जैसे राष्ट्रीय राजधानी में भी हो रहा है

क्या किया जाए?

  • प्राचीन बंद पड़े मंदिर (नबी करीम क्षेत्र) का तुरंत सर्वे,जीर्णोद्धार और पूजा-अर्चना शुरू कराई जाए

  • अवैध मस्जिद निर्माण और सड़क अतिक्रमण पर MCD, पुलिस और DDA की सख्त संयुक्त कार्रवाई हो

  • हिन्दू मतदाताओं को विभाजन से ऊपर उठकर एकजुट होना होगा

  • हिन्दुत्व वाले पार्षद,नेता और संगठनों को शोभायात्रा से आगे बढ़कर स्थायी समाधान (मंदिर संरक्षण,सुरक्षा, सांस्कृतिक कार्यक्रम) पर काम करना चाहिए

रामनगर वार्ड 80 का मामला हिन्दू समाज के लिए एक कठोर चेतावनी है

हिन्दुत्व की रट लगाने वाले अगर मैदान में उतरकर ठोस काम नहीं करेंगे तो इतिहास दोहराएगा समय रहते हिन्दू एकता प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखानी होगी वरना दिल्ली के कई वार्ड रामनगर 80 की राह पर चल पड़ेंगे

यह खोखली घोषणाओं और चुप्पी का समय नहीं है यह स्थायी संघर्ष और संरक्षण का समय है

:- ललित भसोढ़
:- बातें कही अनकही दिल्ली

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