राष्ट्रीय राजधानी में एलपीजी वितरण व्यवस्था का काला सच

सिलेंडर डिलिवरी मैनों का शोषण उपभोक्ताओं के साथ अन्याय और सुरक्षा से खिलवाड़

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में घरेलू रसोई की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक एलपीजी गैस सिलेंडर है घर-घर तक गैस पहुंचाने की यह व्यवस्था आज लाखों परिवारों की जीवनरेखा बन चुकी है राजधानी में विभिन्न कंपनियों जैसे  (इंडेन गैस) (एचपी गैस ) (भारत गैस) के माध्यम से हजारों गैस एजेंसियां संचालित हो रही हैं

 इन एजेंसियों के माध्यम से हर दिन हजारों एलपीजी सिलेंडर उपभोक्ताओं तक पहुंचाए जाते हैं

परंतु इस सुव्यवस्थित दिखने वाली व्यवस्था के पीछे एक ऐसा सच छिपा है जो न केवल गरीब मजदूरों के शोषण को उजागर करता है बल्कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है

दिल्ली की अधिकांश गैस एजेंसियों में सिलेंडर डिलिवरी का काम उत्तर प्रदेश और बिहार से आए गरीब मजदूर तबके के लोग करते हैं ये लोग सुबह से लेकर देर शाम तक भारी-भरकम सिलेंडर ढोते हुए घर-घर गैस पहुंचाते हैं

सरकारी नियमों के अनुसार इन कर्मचारियों को

निश्चित मासिक वेतन

पीएफ

ईएसआई

वर्ष में कम से कम एक बार ड्रेस और सुरक्षा उपकरण

और अन्य श्रम सुविधाएं

प्रदान की जानी चाहिए

लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आती है

वेतन के नाम पर शून्य

कई गैस एजेंसियों में सिलेंडर डिलिवरी मैनों को नियमित मासिक वेतन ही नहीं दिया जाता

डिलिवरी कर्मियों का कहना है कि उन्हें एजेंसी की ओर से कोई निश्चित वेतन नहीं मिलता। उनकी आय का मुख्य स्रोत वही “अतिरिक्त सिलेंडर” होते हैं जिन्हें वे ब्लैक में बेचकर कुछ पैसे कमा पाते हैं

यह स्थिति न केवल श्रम कानूनों का उल्लंघन है बल्कि गरीब मजदूरों को मजबूरी में अवैध गतिविधियों की ओर धकेलने जैसा भी है

पीएफ और ईएसआई कागजों में सुविधा

सरकारी नियमों के अनुसार कर्मचारियों के लिए पीएफ और ईएसआई अनिवार्य हैं

लेकिन वास्तविकता यह है कि

बहुत कम डिलिवरी मैनों को ईएसआई सुविधा मिलती है

अधिकांश मामलों में पीएफ खाते में कोई राशि जमा नहीं होती

जब एक गैस एजेंसी मालिक से इस विषय पर बातचीत की गई तो उसने स्वीकार किया कि ईएसआई की सुविधा कुछ कर्मचारियों को दी जाती है लेकिन पीएफ जमा कराने के बारे में उसे विशेष जानकारी नहीं है क्योंकि उसे एजेंसी लिए अभी “दो-ढाई वर्ष” ही हुए हैं

यह जवाब अपने आप में कई सवाल खड़े करता है

“अतिरिक्त सिलेंडर” और काला बाज़ार

डिलिवरी मैनों के अनुसार गोदाम से उन्हें उपभोक्ताओं के लिए बुक किए गए सिलेंडरों के अलावा कुछ अतिरिक्त सिलेंडर भी मिल जाते हैं

इन सिलेंडरों को वे

ढाबों

होटलों

छोटे दुकानदारों

और अवैध रूप से छोटे सिलेंडर भरने वालों

को ब्लैक में बेच देते हैं

दिल्ली की पॉश कॉलोनियों से लेकर झुग्गी बस्तियों तक छोटे सिलेंडर भरने का यह अवैध कारोबार खुलेआम चलता है

“बांसुरी” से गैस निकालने का खतरनाक खेल

डिलिवरी कर्मियों ने एक बेहद खतरनाक प्रक्रिया का खुलासा किया

जब गैस प्लांट से सिलेंडर एजेंसी के गोदाम में पहुंचते हैं तब कई जगहों पर “बांसुरी” नामक उपकरण का उपयोग किया जाता है

“बांसुरी” दरअसल एक पाइप नुमा उपकरण होता है जिसके माध्यम से एक सिलेंडर से दूसरे सिलेंडर में गैस ट्रांसफर की जाती है

इस प्रक्रिया में

एक सिलेंडर से 1 किलो से लेकर 3 किलो तक गैस निकाल ली जाती है

और बाद में उसी गैस को ब्लैक मार्केट में बेचा जाता है

उपभोक्ताओं के साथ खुला अन्याय

जब किसी सिलेंडर से गैस निकाल ली जाती है तो अंतत नुकसान उपभोक्ता को होता है

उपभोक्ता को

पूरा भुगतान करने के बावजूद कम गैस वाला सिलेंडर मिलता है

सिलेंडर जल्दी खत्म हो जाता है

और उसे बार-बार नया सिलेंडर बुक कराना पड़ता है

यह सीधे-सीधे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है

सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़

गैस सिलेंडर से गैस निकालने की यह प्रक्रिया अत्यंत खतरनाक होती है

थोड़ी सी चिंगारी या लापरवाही

खराब उपकरण या गैस रिसाव

कभी भी बड़े विस्फोट का कारण बन सकता है ऐसी स्थिति में एक छोटी सी गलती सैकड़ों लोगों की जान जोखिम में डाल सकती है यह न केवल कर्मचारियों बल्कि आसपास रहने वाले नागरिकों के लिए भी बड़ा खतरा है।

बैंक खाते में वेतन नियमों की अनदेखी

सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी कर्मचारी का वेतन सीधे उसके बैंक खाते में भेजा जाना चाहिए

लेकिन दिल्ली में अनेकों गैस एजेंसियां इस नियम का पालन नहीं कर रही हैं

अधिकांश डिलिवरी मैनों का कहना है कि

उनके खातों में वेतन नहीं भेजा जाता

या फिर उन्हें नकद भुगतान भी नियमित रूप से नहीं मिलता

इस स्थिति में यह जांच होना बेहद जरूरी है कि आखिर क्यों श्रम कानूनों और सरकारी निर्देशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है

दुर्घटना का खतरा और बीमा की आवश्यकता

सिलेंडर डिलिवरी मैन रोजाना भारी गैस सिलेंडर ढोते हैं भीड़भाड़ वाली सड़कों से गुजरते हैं और कई बार ऊंची इमारतों तक सिलेंडर पहुंचाते हैं

ऐसे में दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है इसलिए आवश्यक है कि

सभी डिलिवरी मैनों का एक्सीडेंटल इंश्योरेंस कराया जाए

उन्हें सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जाए

और कार्यस्थल पर सुरक्षा उपकरणि उपलब्ध कराए जाएं

भ्रष्टाचार पर लगाम कैसे लगे

इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कुछ ठोस कदम उठाने आवश्यक हैं

सरकारी जांचि

सभी गैस एजेंसियों की श्रम कानूनों और पीएफ/ईएसआई अनुपालन की जांच हो।

डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम

हर सिलेंडर की डिजिटल ट्रैकिंग कीइ व्यवस्था हो ताकि गैस की मात्रा में हेरफेर न हो सके

सख्त दंड

गैस चोरी और ब्लैक मार्केटिंग में शामिल एजेंसियों पर कठोर कार्रवाई की जाए

उपभोक्ता जागरूकता

उपभोक्ताओं को सिलेंडर लेते समय उसका वजन जांचने की आदत डालनी चाहिए

डिलिवरी मैनों के अधिकार

श्रम विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कर्मचारियों को उनका वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं मिलें

दिल्ली की एलपीजी वितरण व्यवस्था केवल गैस सप्लाई का सिस्टम नहीं बल्कि लाखों लोगों के जीवन से जुड़ा हुआ तंत्र है

यदि इस व्यवस्था में भ्रष्टाचार,श्रम शोषण और सुरक्षा से खिलवाड़ जारी रहा तो इसका परिणाम गंभीर हो सकता है

सरकार,तेल कंपनियों और प्रशासन को मिलकर इस व्यवस्था को पारदर्शी और सुरक्षित बनाना होगा ताकि

उपभोक्ताओं को उनका अधिकार मिले

मजदूरों का शोषण बंद हो

और राजधानी की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके

:- ललित भसोढ़

:- बातें कही अनकही.दिल्ली

1 thought on “राष्ट्रीय राजधानी में एलपीजी वितरण व्यवस्था का काला सच”

  1. भइया बहुत महत्वपूर्ण जानकारी दी आपने आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

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