सिटीजन चार्टर कानून को भूल गई दिल्ली सरकार
दिल्ली वासीयों को भी जानकारी नहीं है सिटी जन चार्टर की
दिल्ली में नागरिकों को समयबद्ध और पारदर्शी सरकारी सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से “सिटीजन चार्टर” की व्यवस्था लागू की गई थी इसका कानूनी आधार Delhi (Right of Citizen to Time Bound Delivery of Services) Act, 2011 है यह कानून नागरिकों को यह अधिकार देता है कि वे निर्धारित समय सीमा में सरकारी सेवाएँ प्राप्त करें और देरी होने पर शिकायत दर्ज कर सकें
सिटीजन चार्टर कानून कब लागू हुआ?
यह कानून वर्ष 2011 में दिल्ली सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया था इसके लागू होने के बाद विभिन्न सरकारी विभागों जैसे गृह विभाग, राजस्व विभाग, शिक्षा विभाग और पुलिस—ने अपने-अपने सिटीजन चार्टर तैयार किए
इन चार्टर्स में निम्नलिखित बातें स्पष्ट की गईं
- सेवाओं की सूची
- सेवा प्रदान करने की समय-सीमा
- जिम्मेदार अधिकारी
- शिकायत निवारण प्रक्रिया
- कानून के मुख्य उद्देश्य
- सिटीजन चार्टर कानून का मूल उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाना है
मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं
- नागरिकों को समयबद्ध सेवाओं का अधिकार देना
- सरकारी कार्यप्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करना
- सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना
- शिकायत निवारण के लिए स्पष्ट व्यवस्था प्रदान करना
- कानूनी प्रावधान और अधिकार
- इस कानून के तहत यदि किसी नागरिक को निर्धारित समय सीमा में सेवा नहीं मिलती है तो वह शिकायत दर्ज कर सकता है।
प्रमुख प्रावधान
- समय सीमा में सेवा न मिलने पर अपील का अधिकार
- संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करना
- शिकायत के निस्तारण की निर्धारित प्रक्रिया
- कुछ मामलों में दंडात्मक प्रावधान भी
- विभागीय सिटीजन चार्टर की व्यवस्था
- दिल्ली के लगभग सभी प्रमुख विभागों ने अपने-अपने सिटीजन चार्टर जारी किए हैं इनमें शामिल हैं
- गृह विभाग
- राजस्व विभाग
- दिल्ली पुलिस
- शिक्षा विभाग
हर विभाग अपने स्तर पर सेवाओं और समय-सीमा का निर्धारण करता है, जिससे नागरिकों को स्पष्ट जानकारी मिल सके
वर्तमान स्थिति कागज़ों तक सीमित व्यवस्था
हालांकि सिटीजन चार्टर का ढांचा मजबूत है लेकिन इसकी वास्तविक स्थिति चिंताजनक है
वर्तमान हालात
कई विभागों में चार्टर सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है
समयबद्ध सेवाओं का पालन नियमित रूप से नहीं हो रहा
शिकायत निवारण तंत्र कमजोर और धीमा है
नागरिकों में भी इस कानून के प्रति जागरूकता की कमी है
प्रशासनिक पहल और प्रशिक्षण
सिटीजन चार्टर को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा समय-समय पर कार्यशालाएँ आयोजित की गईं फरवरी 2003 में भी एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई थी जिसमें इसकी कार्यप्रणाली और प्रशिक्षण पर जोर दिया गया
सिटीजन चार्टर कानून एक सशक्त और जनहितकारी पहल है जो नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करता है और सरकारी तंत्र को जवाबदेह बनाता है। लेकिन वर्तमान में यह कानून अपनी पूरी क्षमता से लागू नहीं हो पा रहा है
अब आवश्यकता है
सरकार की सख्ती और निगरानी की
विभागों की जवाबदेही तय करने की
और सबसे महत्वपूर्ण, नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने की
तभी यह कानून अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा कर सकेगा और दिल्ली में सुशासन की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा
: – ललित भसोढ़
: – बातें कही अनकही, दिल्ली
