रामकुमार मार्ग का जर्जर पशु चिकित्सालय बना “मौत का ढांचा” कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
शिकायतों के बावजूद प्रशासन मौन
राजधानी दिल्ली के बीचों-बीच स्थित रामकुमार मार्ग पर बना पशु चिकित्सा केंद्र आज बदहाली लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता का जीवंत उदाहरण बन चुका है कभी यह केंद्र स्थानीय पशुपालकों आवारा पशुओं और जरूरतमंद नागरिकों के लिए राहत का प्रमुख माध्यम हुआ करता था लेकिन आज इसकी स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि लोग इसे “मौत का ढांचा” कहने लगे हैं यह भवन वर्षों से बंद पड़ा है और अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है दीवारों में गहरी दरारें साफ नजर आती हैं जगह-जगह से प्लास्टर झड़ चुका है और छत की हालत भी बेहद कमजोर हो चुकी है आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि हल्की सी बारिश या तेज हवा के झोंके में भी यह इमारत हिलती हुई महसूस होती है स्थिति इतनी खतरनाक हो चुकी है कि यह भवन कभी भी अचानक गिर सकता है और किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकता है स्थानीय लोगों के अनुसार इस भवन के आसपास रोजाना सैकड़ों लोग आवाजाही करते हैं जिनमें बच्चे,बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं यदि यह इमारत गिरती है तो कई निर्दोष लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है जो प्रशासनिक संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े करता है इस केंद्र की दुर्दशा को और भयावह बनाता है भवन की दीवार के बिल्कुल पास उगा एक विशाल पीपल का पेड़ इस पेड़ की जड़ें दीवारों में गहराई तक समा चुकी हैं और संरचना को अंदर से खोखला कर रही हैं विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे पेड़ भवन की नींव को कमजोर कर देते हैं जिससे ढहने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है बावजूद इसके, न तो इस पेड़ को हटाने की कोई पहल की गई है और न ही भवन की मरम्मत की दिशा में कोई कार्रवाई दिखाई देती है स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि इस केंद्र के बंद होने से उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है पहले यहां नियमित रूप से पशु चिकित्सक उपलब्ध रहते थे और बीमार या घायल पशुओं का तुरंत इलाज हो जाता था लेकिन अब स्थिति यह है कि लोगों को अपने पालतू या घायल पशुओं को लेकर कई किलोमीटर दूर अन्य क्षेत्रों में जाना पड़ता है, जिससे समय धन और मेहनत तीनों का नुकसान होता है कई बार समय पर इलाज न मिलने के कारण पशुओं की जान भी चली जाती है जो इस लापरवाही की एक दुखद तस्वीर पेश करता है
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि उन्होंने इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार दिल्ली नगर निगम और दिल्ली सरकार के संबंधित विभागों को शिकायतें भेजी हैं इतना ही नहीं उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के कार्यालय को भी अनेकों बार पत्र लिखकर इस जर्जर भवन के पुनर्निर्माण और पशु चिकित्सालय को पुन शुरु करने की मांग की है लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन सभी शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है यह मामला तब और अधिक गंभीर हो जाता है जब हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा दिल्ली के पशु चिकित्सालयों के कायाकल्प और आधुनिकीकरण की बड़ी घोषणा की गई थी इस घोषणा में कहा गया था कि राजधानी के सभी पशु अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा उन्हें बेहतर बनाया जाएगा और पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा लेकिन रामकुमार मार्ग स्थित यह पशु चिकित्सा केंद्र उस घोषणा की वास्तविकता पर सवाल खड़ा करता है जहां एक ओर सरकार नई योजनाओं और घोषणाओं के जरिए विकास की बात कर रही है वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर ऐसे जर्जर और खतरनाक भवन प्रशासन की अनदेखी का शिकार बने हुए हैं यह स्पष्ट करता है कि योजनाओं और उनके क्रियान्वयन के बीच एक बड़ा अंतर मौजूद है स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते इस भवन को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो यह किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि या तो इस भवन का तत्काल पुनर्निर्माण कराया जाए या फिर इसे पूरी तरह गिराकर नई इमारत का निर्माण किया जाए साथ ही पशु चिकित्सा सेवाओं को जल्द से जल्द पुन शुरु किया जाए ताकि क्षेत्र के पशुओं और पशुपालकों को राहत मिल सके
इसके अलावा लोगों ने यह भी मांग की है कि जब तक इस भवन को सुरक्षित नहीं किया जाता तब तक इसके आसपास सुरक्षा घेरा ( बैरिकेडिंग ) लगाया जाए ताकि आम जनता की आवाजाही को नियंत्रित किया जा सके और किसी भी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके यह मामला केवल एक जर्जर भवन का नहीं है बल्कि यह प्रशासनिक जिम्मेदारी जनसुरक्षा और पशु कल्याण से जुड़ा हुआ एक गंभीर मुद्दा है यदि इसे नजरअंदाज किया गया तो इसके परिणाम बेहद दुखद हो सकते हैं
अंत में
रामकुमार मार्ग स्थित यह पशु चिकित्सा केंद्र आज एक चेतावनी बनकर खड़ा है चेतावनी इस बात की कि यदि समय रहते लापरवाही को नहीं रोका गया तो यह किसी भी दिन एक बड़ी त्रासदी में बदल सकती है अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिल्ली नगर निगम और दिल्ली सरकार इस गंभीर मुद्दे पर कब जागते हैं और कब तक स्थानीय लोगों को राहत मिलती है
: – ललित भसोढ़
: – बातें कही अनकही दिल्ली
