रामनगर वार्ड-80 में अवैध निर्माण पर दोहरे मापदंड? गरीबों पर सख्ती रसूखदारों को राहत

एमसीडी के वर्क्स विभाग पर गंभीर आरोप बेलदारों के जरिए ‘सेटिंग’ और चयनात्मक कार्यवाही की चर्चा

दिल्ली नगर निगम के सदर पहाड़गंज ज़ोन कश्मीरी गेट दिल्ली के अंतर्गत आने वाले रामनगर वार्ड-80 में वर्क्स विभाग के अधिकारियों एई और जेई की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं स्थानीय निवासियों का आरोप है कि विभाग की कार्यवाही में पारदर्शिता की कमी है और नियमों का पालन समान रूप से नहीं किया जा रहा स्थानीय लोगों के मुताबिक यदि कोई गरीब व्यक्ति अपने जर्जर मकान की मरम्मत या पुनर्निर्माण करना चाहता है तो उसे कड़ी कार्यवाही और नोटिसों का सामना करना पड़ता है वहीं दूसरी ओर यदि निर्माण कार्य किसी बिल्डर के माध्यम से हो रहा हो या उसे किसी जनप्रतिनिधि का समर्थन प्राप्त हो तो वही नियम शिथिल पड़ जाते हैं

शिकायत के बाद बढ़ती ‘सक्रियता’

आरोप है कि जैसे ही किसी निर्माण कार्य की शिकायत पड़ोसी द्वारा की जाती है विभागीय अधिकारी तुरंत सक्रिय हो जाते हैं इसके बाद बेलदारों के माध्यम से मकान मालिक से संपर्क कर ‘समझौता’ करने की कोशिश की जाती है यदि मामला ‘सेट’ नहीं होता तो मकान मालिक को नोटिस जारी कर दस्तावेज़ों की लंबी सूची मांगी जाती है जिसमें वर्षों पुराने बिजली बिल तक शामिल होते हैं सूत्रों का कहना है कि कई मामलों में दस्तावेज़ों में छोटी-छोटी आपत्तियों के आधार पर निर्माण को अवैध घोषित कर दिया जाता है वहीं यदि अनौपचारिक समझौता हो जाए तो वही कार्य बिना किसी बाधा के जारी रहता है

एक ही गली में अलग-अलग नियम

स्थानीय उदाहरणों में सामने आया है कि एक ही गली में दो समान प्रकार के निर्माण कार्य चल रहे थे जिनमें से एक को बिना अनुमति के भी जारी रहने दिया गया जबकि दूसरे को अवैध बताकर कार्यवाही शुरू कर दी गई बताया जाता है कि पहले निर्माण को किसी प्रभावशाली / माननीय व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त था इसी तरह एक अन्य बड़े निर्माण को भी कथित तौर पर राजनीतिक समर्थन के चलते वैध माना जा रहा है जो विगत कई महीनों से बन रहा है जबकि छोटे मकान मालिकों के कार्यों पर सख्ती बरती जा रही है

पुराने निर्माण भी नहीं सुरक्षित

चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि वर्षों पहले बने मकानों को भी शिकायत के आधार पर अवैध घोषित कर ‘बुक’ किया जा रहा है कुछ मामलों में मकान मालिक और निगम अधिकारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बनी हुई है इन घटनाओं के बाद क्षेत्र के निवासियों में भारी नाराज़गी है लोगों का कहना है कि यदि नियम हैं तो उनका पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए

रामनगर वार्ड-80 में चल रही यह स्थिति न केवल प्रशासनिक कार्य प्रणाली पर सवाल उठाती है बल्कि यह भी दर्शाती है कि आम आदमी और रसूखदारों के लिए नियम अलग-अलग तरीके से लागू हो रहे हैं अब देखना यह होगा कि नगर निगम इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है..

: – ललित भसोढ़

: – बातें कही अनकही, दिल्ली

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