डीडीए पार्क हरियाली का सपना या असुरक्षा का जाल?

डीडीए पार्क हरियाली का सपना या असुरक्षा का जाल?

Shivaji Marg (Part-2) DDA park Delhi

दिल्ली जैसे महानगर में जहां कंक्रीट के जंगल लगातार फैल रहे हैं और प्रदूषण हर दिन नई ऊंचाइयों को छू रहा है वहां हरियाली का एक छोटा सा टुकड़ा भी लोगों के लिए किसी राहत से कम नहीं होता ऐसे में राजधानी के कई इलाकों में बनाए गए पार्क सिर्फ मनोरंजन के स्थान नहीं बल्कि जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने का माध्यम बनते हैं इसी कड़ी में पश्चिमी दिल्ली के शिवाजी मार्ग नजदीक डी एल एफ मोती नगर नई दिल्ली (भाग-2) स्थित डीडीए पार्क भी कभी स्थानीय निवासियों के लिए सुकून का केंद्र माना जाता था सुबह की सैर,योगाभ्यास, बच्चों का खेलना और बुजुर्गों की बैठकी ये सब इस पार्क की पहचान हुआ करते थे लेकिन समय के साथ इस पार्क की तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है

आज यह पार्क हरियाली के सपनों से अधिक लापरवाही,अव्यवस्था और सुरक्षा की चिंताओं का प्रतीक बनता जा रहा है स्थानीय लोगों की शिकायतों,इस रिपोर्ट में हमने जमीनी हालात और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के आधार पर इस पार्क की वास्तविक स्थिति को समझने की कोशिश की है

पार्कों की अहमियत महानगरों की ‘ग्रीन लाइफलाइन’

दिल्ली जैसे शहर में पार्क सिर्फ मनोरंजन का स्थान नहीं होते बल्कि ये पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद जरूरी हैं शहर में बढ़ते प्रदूषण,ट्रैफिक और शोर के बीच ये पार्क नागरिकों को स्वच्छ हवा और मानसिक शांति प्रदान करते हैं

राजधानी में कई पार्कों का प्रबंधन

दिल्ली विकास प्राधिकरण के अधीन है डीडीए का दायित्व है कि इन पार्कों में हरियाली साफ-सफाई,सुरक्षा और सुविधाओं का उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए लेकिन जब किसी पार्क में इन बुनियादी व्यवस्थाओं की कमी होने लगे तो सवाल उठना स्वाभाविक है क्या पार्कों के रखरखाव को लेकर जिम्मेदार एजेंसियां अपने दायित्व निभा रही हैं?

शिवाजी मार्ग (भाग-2) का डीडीए पार्क उम्मीद से निराशा तक

स्थानीय लोगों के अनुसार शिवाजी मार्ग (भाग-2) का यह पार्क पहले काफी व्यवस्थित हुआ करता था सुबह-शाम यहां लोगों की अच्छी खासी भीड़ दिखाई देती थी

बच्चे खेलते थे महिलाएं समूह में टहलती थीं बुजुर्ग यहां बैठकर बातचीत करते थे और कई लोग योग या प्राणायाम करते नजर आते थे लेकिन पिछले कुछ समय में पार्क की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है यहां आने वाले नियमित लोगों का कहना है कि पार्क की देखरेख और सुरक्षा दोनों में गंभीर कमी दिखाई देती है

सुरक्षा का संकट जब पार्क में ही असुरक्षा महसूस हो

पार्क जैसी सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षा सबसे अहम पहलू होती है खासतौर पर महिलाओं बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित वातावरण होना जरूरी है लेकिन शिवाजी मार्ग नजदीक डी एल एफ (भाग-2) के इस पार्क में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं

गार्डों की कमी

स्थानीय लोगों का कहना है कि पार्क में पर्याप्त सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं हैं कई बार तो पूरा पार्क बिना किसी गार्ड के ही चलता है यदि किसी घटना या विवाद की स्थिति पैदा हो जाए तो तुरंत हस्तक्षेप करने वाला कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद नहीं होता निगरानी व्यवस्था कमजोर पार्क में कुछ स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि उनमें से कई कैमरे या तो बंद हैं या उनकी निगरानी नियमित रूप से नहीं की जाती ऐसे में असामाजिक तत्वों के लिए पार्क एक आसान जगह बन जाता है असामाजिक गतिविधियों की शिकायतें पार्क में आने वाले कुछ लोगों का आरोप है कि रात के समय यहां असामाजिक गतिविधियों की घटनाएं बढ़ जाती हैं स्थानीय निवासियों के अनुसार कई बार पार्क के अंदर शराब पीने,झगड़े या संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें भी सामने आई हैं हालांकि इन घटनाओं की आधिकारिक पुष्टि हर बार नहीं हो पाती लेकिन स्थानीय स्तर पर लोगों में असुरक्षा की भावना जरूर बढ़ी है

Shivaji Marg (Part-2) DDA park Delhi
Shivaji Marg (Part-2) DDA park Delhi

सफाई व्यवस्था कागजों में बजट जमीन पर गंदगी

किसी भी पार्क की खूबसूरती उसकी हरियाली और साफ-सफाई से होती है लेकिन जब यही व्यवस्था कमजोर पड़ जाए तो पार्क का माहौल खराब होने लगता है

शिवाजी मार्ग (भाग-2) के इस पार्क में भी सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं

कचरे की समस्या कई जगहों पर कचरा जमा होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं टूटे पत्ते,प्लास्टिक,बोतलें और अन्य कचरा कई बार लंबे समय तक साफ नहीं होता इससे पार्क का वातावरण खराब होता है और लोगों का वहां समय बिताने का अनुभव भी प्रभावित होता है माली और कर्मचारियों की कमी स्थानीय लोगों का कहना है कि पार्क में नियमित रूप से माली या सफाईकर्मी दिखाई नहीं देते परिणामस्वरूप पौधों की देखभाल भी प्रभावित होती है और कई जगह घास या पौधे सूखते नजर आते हैं

आवारा कुत्तों की समस्या

पार्क में आवारा कुत्तों की मौजूदगी भी एक बड़ी समस्या बनती जा रही ह सुबह और शाम के समय कई कुत्ते झुंड में घूमते दिखाई देते हैं जिससे बच्चों और बुजुर्गों को डर लगता है कुछ लोगों का कहना है कि कुत्तों के भौंकने या दौड़ाने काटने की घटनाएं भी सामने आई हैं यह समस्या सिर्फ इस पार्क तक सीमित नहीं है बल्कि दिल्ली के कई सार्वजनिक स्थानों पर आवारा पशुओं का मुद्दा गंभीर बन चुका है

Shivaji Marg (Part-2) DDA park Delhi

फरवरी 2026 की घटना और बदली पार्क की टाइमिंग

स्थानीय निवासियों के अनुसार फरवरी 2026 में पार्क के भीतर एक अप्रिय घटना हुई थी जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया इस घटना के बाद प्रशासन ने पार्क की समय-सारणी में बदलाव कर दिया अब पार्क सुबह लगभग 5 बजे से 7 बजे तक और शाम को लगभग 6 बजे से 8 बजे तक ही खुलता है बाकी समय पार्क बंद रहता है हालांकि प्रशासन का तर्क है कि यह कदम सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है लेकिन कई स्थानीय लोग इसे स्थायी समाधान नहीं मानते उनका कहना है कि समय सीमित करने से समस्या खत्म नहीं होगी बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना ज्यादा जरूरी है

जिम्मेदारी किसकी?

इस सवाल का जवाब तलाशना जरूरी है कि आखिर पार्क की मौजूदा स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है

डीडीए के अधीन आने वाले पार्कों में रखरखाव की जिम्मेदारी आमतौर पर संबंधित विभाग या ठेके पर काम करने वाली एजेंसियों के पास होती है यदि सुरक्षा सफाई या निगरानी में कमी है तो यह जांच का विषय बनता है कि जिम्मेदार एजेंसियां अपने दायित्व ठीक से निभा रही हैं या नहीं

स्थानीय निवासियों की मांग

शिवाजी मार्ग (भाग-2) के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि यह पार्क उनके दैनिक जीवन का अहम हिस्सा है इसलिए वे चाहते हैं कि यहां सुधार जल्द किए जाएं

पर्याप्त सुरक्षा गार्डों की तैनाती

सीसीटीवी कैमरों की नियमित निगरानी

सफाई और बागवानी व्यवस्था को मजबूत करना

आवारा कुत्तों की समस्या का मानवीय और प्रभावी समाधान

असामाजिक गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई

पार्को को बचाना क्यों जरूरी है

दिल्ली जैसे शहर में जहां वायु गुणवत्ता अक्सर चिंताजनक स्तर तक पहुंच जाती है वहां पार्क और हरित क्षेत्र लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी हैं ये स्थान न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं बल्कि सामाजिक जीवन को भी मजबूत करते हैं यदि इनकी देखरेख में लापरवाही बरती गई तो आने वाले समय में शहर के लोगों के पास खुली और सुरक्षित जगहों की कमी और बढ़ सकती है

सवाल के जवाब का इंतजार

शिवाजी मार्ग (भाग-2) का यह डीडीए पार्क आज कई सवालों के साथ खड़ा है

क्या यह पार्क फिर से सुरक्षित और स्वच्छ बन पाएगा?

क्या जिम्मेदार एजेंसियां समय रहते आवश्यक कदम उठाएंगी?

और क्या स्थानीय लोगों को वह हरियाली और सुकून फिर मिल पाएगा जिसके लिए ये पार्क बनाए गए थे?

इन सवालों के जवाब आने वाले समय में प्रशासनिक कार्रवाई और जनभागीदारी पर निर्भर करेंगे

क्योंकि अगर शहर की हरियाली बचानी है तो सिर्फ पेड़ लगाना ही काफी नहीं उनकी सुरक्षा और देखभाल भी उतनी ही जरूरी है

: – ललित भसोढ़

: – बातें कही अनकही, दिल्ली

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