"चलो फिर से मुस्कुराएं "
अंतर्मन की पीड़ा
जब राहें हों धुंधली सी,
और मन डर से भर जाए,
जब सपनों की परछाई भी,
दूर कहीं खो जाए…
तब रुकें नहीं,चलो फिर से,
एक दीप उम्मीद का जलाए
छोटे-छोटे पलों में हँस कर,
चलो फिर से मुस्कुराए
हर रात के बाद सवेरा आता,
हर दुख में छिपा सुख का गीत,
ये जीवन बस एक सफर है, ‘ललित’
हर मोड़ पे मिलता है कोई मीत
गिरने से डर मत रख मन में,
गिर के ही तो सीखा जाता है,
हर आँसू बहकर कहता है,
“अंदर कुछ अच्छा बचा है”
तो आओ इस डर को थामें,
और हौसले की चादर ओढ़ लें,
कल की चिंता छोड़ के मित्र,
आज को फिर से जी लें
– ललित भसोढ़
– बातें कही अनकही,दिल्ली
