दिल्ली एनसीआर के फूड किंग अमिताभ स. उनकी कलम ने स्वाद की दुनिया बदल दी
ललित भसोढ़ बातें कहीं अनकहीं,दिल्ली
3 मार्च 2025, दिल्ली की तंग- संकरी गलियों से लेकर पॉश इलाकों तक फुटपाथी ठेलों से होटल्स की चमचमाती प्लेटों तक खाने के शौकीनों के दिलों पर राज करता नाम है अमिताभ स.। पत्रकारिता की इस शख़्सियत को दिल्ली एनसीआर का पहला फूड ब्लॉगर कहा जाता है। उनकी कलम ने न सिर्फ स्वादिष्ट व्यंजनों की खोज की, बल्कि अनगिनत छोटे- मोटे रेहड़ी वालों की रोजी- रोटी भी संवारी है।
हाल ही में, एक खास मुलाकात में अमिताभ स. जी से चाय की चुस्कियों के बीच बातचीत हुई। बातें न सिर्फ प्रेरणादायक रहीं, बल्कि दिल्ली के फूड सीन की अनकही कहानियां भी उजागर कर गईं। उनका सफर पत्रकार के तौर पर से शुरु हुआ (सांध्य टाइम्स के पूर्व संपादक स्व श्री सत सोनी जी को वह पत्रकारिता जगत में अपना गुरु मानते हैं), लेकिन जल्दी वह फूड ब्लॉगर की दुनिया में छा गए।दिल्ली की चांदनी चौक की घंटे वाली हलवाई की सोहन हलवा जैसी शाही मिठाइयों से लेकर नटराज कैफ़े के दही भल्ले और देसी घी की कुरकुरी आलू टिक्कियाँ, सदर की नंद दी हट्टी के देसी घी के पिंडी छोले- भठूरे की तैरती खुशबू, परांठे वाली गली के ढेर स्टफिंग के देसी घी के तवा परांठें, बिल्ले दी हट्टी की लस्सी की ठंडक, मुल्तानी ढांडा के चूर -चूर नानों का कुरमुरी गरमाहट तक उन्होंने दिल्ली के चप्पे- चप्पे और कोने- कोने को टटोला है। फ़ाइव स्टार होटलों के चाइनीज़ और मुगलाई पकवानों से लेकर स्ट्रीट फूड की पिठ्ठी वाली कचौड़ियों तक उनका ब्लॉग और कॉलम्स राष्ट्रीय स्तर पर नियमित छपते हैं।
दैनिक हिंदुस्तान से शुरू हो कर सांध्य टाइम्स, नवभारत टाइम्स और अब अमर उजाला जैसे राष्ट्रीय अखबारों में उनके लेख समय- समय पर छपते रहते हैं। ये न सिर्फ खाने वालों को गाइड करते हैं, बल्कि खिलाने वालों के लिए भी ‘मार्केटिंग टूल’ साबित होते रहे हैं। और तो और, उनके फूड कॉलम्स को पढ़ने के बाद आज के कई फूड ब्लॉगर उन- उन ठीहे- ठिकानों पर जाकर अपने विडियो बनाते हैं।
‘मेरा काम सिर्फ खाना खोजना नहीं, बल्कि उनके आगे- पीछे की कहानियां ढूंढना है..’, अमिताभ स. जी ने चाय की प्याली थामे हुए कहते है।
उनकी शांत, सादी और मिलनसार शख्सियत बिल्कुल वैसी ही है जैसी उनकी लेखनी सरल है। उनसे लंबी मुलाकात के दौरान पता चला कि उनके कॉलम्स ने अनगिनत छोटे व्यवसायियों को नई ऊंचाइयां दी हैं। खान- पान की कई रेहड़ी- दुकानों ने तो उनके पुराने- पुराने लेख फ्रेम में सजाकर दुकानों पर यूं टांग रखे हैं, मानो उनके लिए ‘बिजनेस अवॉर्ड’ है।
अमिताभ स. जी की नजर सिर्फ स्वाद पर नहीं, सेहत पर भी रहती है। वह ज़ोर दे कर कहते हैं, ‘अच्छा खाना वही है, जो ताजा हो, स्वच्छ हो और दिलों पर राज करने लगे।’
दिल्ली के फूड लवर्स के लिए अमिताभ जी एक लिविंग लेजेंड हैं। आज भी हर हफ्ते सैकड़ों फॉलोअर्स उनके टिप्स पर अमल करते हैं। चाहे वह ठंडेठार शरबत की ताजगी हो, या कोयले पर सिकता व धुएं की महक में लिपटा मटन सींक कोरमा।
‘उनके कॉलम्स देख- पढ़ कर हमने कई नई जगहें खोजीं, साथ ही, अपने शहर को और प्यार करना सीखा !’, कहते हैं दिल्ली के एक फूड दीवाने, जो अमिताभ.स जी के फैन क्लब का हिस्सा हैं।
अमिताभ स. की कहानी सिर्फ फूड की नहीं, बल्कि समर्पण की है। एक ऐसे दौर में, जब सोशल मीडिया पर फूड इन्फ्लुएंसर्स की भरमार है, अमिताभ स. कलम की ताकत बरकरार है।
कुछ साल पहले, दिल्ली के स्ट्रीट फूड पर उनकी किताब ‘चटपटी दिल्ली’ नवभारत टाइम्स ने ही छापी है। किताब दिल्ली एनसीआर के लुके- छुपे- अनछुए ठिकानों को दुनिया के सामने लाई है। अगर आप भी दिल्ली के जायकेदार सफर पर चलना चाहें, तो अमिताभ स. के कॉलम्स से शुरु करें। क्योंकि उनके शब्दों मे खाना- पीने पेट भरने का ज़रिया मात्र नहीं है, यादगार अनुभव देने के लिए है।
:- ललित भसोढ़
:- बातें कहीं अनकहीं,दिल्ली

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“बातें कहीं अनकहीं, दिल्ली” वेबसाइट लॉन्चिंग की
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आपकी यह नई पहल निश्चित रूप से
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