भ्रष्टाचार की दीवारों पर खड़ा “विकास” बस्ती सिकलीग्रान का "सार्वजनिक शौचालय"अधूरा सच



दिल्ली नगर निगम के सदर पहाड़गंज ज़ोन, कश्मीरी गेट के अंतर्गत आने वाले रामनगर वार्ड–80 स्थित बस्ती सिकलीग्रान, बैग मार्केट का सार्वजनिक शौचालय आज “विकास” के नाम पर खड़े किए गए भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है जिस शौचालय को बनने में करीब दो साल का समय लगा वह अब 15–20 दिनों से चालू तो है लेकिन आज तक उसका कोई औपचारिक उद्घाटन नहीं हुआ बिना गुणवत्ता जांच बिना सुरक्षा मानकों और बिना जिम्मेदारी तय किए इसे जैसे-तैसे जनता के उपयोग के लिए खोल दिया गया
चालू है शौचालय… लेकिन बदबू और बदहाली भी बराबर चालू स्थिति यह है कि यहाँ सफाई केवल सुबह के समय की जाती है उसके बाद पूरा दिन बदबू का ऐसा माहौल रहता है कि बाहर से आने वाले व्यापारी और ग्राहक नाक-मुंह सिकोड़ते हैं और स्थानीय निवासियों को ताने सुनाते हैं यह सफाई व्यवस्था नहीं बल्कि निगम की असंवेदनशीलता का स्पष्ट प्रमाण है सीलन छत की दरारें और झड़ता पलस्तर “नई” इमारत की असली तस्वीर
जिस भवन को नया बताया जा रहा है उसकी दीवारों में साफ़-साफ़ सीलन दिखाई देती है कई जगह से पलस्तर पहले ही गिर चुका था जिसे बाद में खानापूर्ति के तौर पर मरम्मत किया गया सबसे चिंताजनक स्थिति इसकी छत की है, जहां दरारें और कमजोर निर्माण साफ नज़र आता है पुरानी मज़बूत इमारत तोड़ दी कमजोर ढांचा बना दिया
स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि जो पुराना शौचालय था वह कहीं ज़्यादा मजबूत था और केवल मरम्मत की जरूरत थी मगर उसे पूरी तरह तोड़ा भी नहीं गया अधूरे ढांचे पर ही नया निर्माण खड़ा कर दिया गया यहां तक कि पुरुष शौचालय की सीढ़ियां आज भी पुरानी ही हैं यानी नई रचना के नाम पर पुरानी खामियों को ही ढोया जा रहा है भ्रष्टाचार की जड़-अधिकारियों की मिलीभगत
इस पूरे मामले में सवाल सीधे खड़े होते हैं क्या यह निर्माण बिना तकनीकी निरीक्षण के पास किया गया?
क्या वर्क्स डिपार्टमेंट के AE, JE और अन्य संबंधित अधिकारियों ने आँखें मूँद रखीं या उन्हें सब दिखाई ही नहीं दिया? क्या यह सब स्थानीय निगम पार्षद की लापरवाही और उदासीनता के बिना संभव था?
यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि पूर्व नियोजित मिलीभगत और भ्रष्टाचार की ओर साफ इशारा करता है
सवाल इस मुद्दे को लेकर दैनिक सांध्य टाइम्स में प्रकाशित लोग कहते हैं कालम में पहले ही यह सवाल प्रमुखता से उठ चुका है “बैग मार्केट सिकलीग्रान में कब बनेगा शौचालय?”लेकिन अफसोस की बात यह है कि खबर प्रकाशित होने के बाद भी निगम और संबंधित अधिकारियों की नींद नहीं खुली सवाल जो दिल्ली की जनता पूछ रही है क्या दिल्ली में विकास सिर्फ कागज़ों में होगा? क्या जनता को घटिया निर्माण और बदबू के बीच जीने के लिए मजबूर किया जाता रहेगा?क्या सदर पहाड़गंज ज़ोन और कश्मीरी गेट जोन के अधिकारी सिर्फ फाइलों पर हस्ताक्षर करने के लिए हैं? अब समय है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच हो दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई हो और जनता के पैसे का हिसाब लिया जाए यह सिर्फ एक शौचालय की कहानी नहीं यह दिल्ली नगर निगम की कार्यशैली पर एक खुला सवाल है
:- ललित भसोढ़
:- बातें कहीं अनकहीं दिल्ली
