झंडेवालान में गैस एजेंसियों का काला खेल कर्मचारियों का शोषण

उपभोक्ताओं से धोखाधड़ी और सिस्टम की चुप्पी पर उठते सवाल

राजधानी दिल्ली के झंडेवालान मंदिर के आसपास संचालित Indian Oil Corporation से संबद्ध गैस एजेंसियों को लेकर एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है यह मामला केवल श्रम कानूनों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें उपभोक्ताओं के साथ खुलेआम धोखाधड़ी और सिस्टम की मिलीभगत जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हो चुके हैं

कर्मचारियों का शोषण बिना वेतन बिना अधिकार

सूत्रों और एजेंसियों में कार्यरत कर्मचारियों के अनुसार डिलीवरी मैनों को न तो निर्धारित मासिक वेतन दिया जाता है और न ही कंपनी के नियमों के अनुसार वर्दी और पहचान पत्र सबसे गंभीर बात यह है कि कर्मचारियों को ईएसआई (ESI) और पीएफ (PF) जैसी बुनियादी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है जो भारतीय श्रम कानूनों के तहत अनिवार्य हैं

कर्मचारियों का कहना है कि यदि कोई अपने अधिकारों की मांग करता है तो उसे नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है इतना ही नहीं एजेंसी छोड़ने के बाद भी अन्य एजेंसियों में काम मिलने से रोका जाता है जो एक प्रकार से “अनौपचारिक ब्लैकलिस्टिंग” है

ब्लैक में सिलेंडर बेचने का खुलासा

जब कर्मचारियों से पूछा गया कि बिना वेतन उनका गुज़ारा कैसे होता है तो जो सच्चाई सामने आई वह और भी चौंकाने वाली है कर्मचारियों के अनुसार, एजेंसी संचालक उन्हें रोज़ाना 2-3 गैस सिलेंडर “ऑफ रिकॉर्ड” देते हैं जिन्हें वे बाजार में ब्लैक में बेचकर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं

यह न केवल कंपनी के नियमों का उल्लंघन है बल्कि आम उपभोक्ताओं के अधिकारों पर भी सीधा हमला है जिन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल पाता

उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी कम गैस ज्यादा कीमत

आरोप यह भी है कि एजेंसियों पर सिलेंडरों में गैस की अवैध कटिंग (कम मात्रा देना) कराई जाती है इसका सीधा नुकसान आम उपभोक्ताओं को झेलना पड़ रहा है जो पूरी कीमत चुकाने के बावजूद कम गैस प्राप्त कर रहे हैं कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिलते और जब मिलते हैं तो उनमें वजन की कमी पाई जाती है “आन कैमरा” और “ऑफ कैमरा” का दोहरा चेहरा

दिप्ती गैस एजेंसी के मालिक ललित गुप्ता का व्यवहार “आन कैमरा” सख्त और दबावपूर्ण दिखाई देता है जबकि “ऑफ कैमरा” उनका रवैया और भी अधिक कठोर और अपमानजनक बताया गया है कर्मचारियों के साथ इस प्रकार का व्यवहार कार्यस्थल पर उत्पीड़न की श्रेणी में आता है

सूत्रों के अनुसार एजेंसी पर सिलेंडरों की सप्लाई और वितरण को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं हैं बताया जा रहा है कि करीब चार ट्रक सिलेंडरों की डिलीवरी का हिसाब तक स्पष्ट नहीं है जिसके कारण कई बार उपभोक्ताओं को “नो स्टॉक” का बहाना सुनना पड़ता है अन्य एजेंसियां भी पीछे नहीं दिप्ती गैस एजेंसी के साथ ही स्थित “अनंत जी गैस” एजेंसी पर भी इसी प्रकार के आरोप लगे हैं एजेंसी संचालक गीतांश जुनेजा का कथित बयान“जिसे सिलेंडर चाहिए, वह खुद आकर ले जाए” न केवल उपभोक्ता सेवा की धज्जियां उड़ाता है बल्कि कंपनी के डिलीवरी मॉडल पर भी सवाल खड़े करता है यहां स्थिति इतनी खराब बताई जा रही है कि पूरे इलाके नबी करीम,गली सब्जी बाजार,गली हनुमान मंदिर—में केवल एक डिलीवरी मैन शिव प्रसाद ही जिम्मेदारी संभाल रहा है जो अधिकतर समय गांव में रहता है

इंडियन ऑयल के अधिकारी पर सवाल सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जब इस पूरे मामले की शिकायत Indian Oil Corporation की एरिया सेल्स मैनेजर (ASM) से की गई तो कार्यवाही करने के बजाय उन्होंने शिकायतकर्ता की पहचान ही संबंधित एजेंसी संचालक को उजागर कर दी

यह न केवल शिकायतकर्ता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है बल्कि यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं सिस्टम के भीतर जवाबदेही की भारी कमी है इससे यह भी आशंका उत्पन्न होती है कि क्या एजेंसी संचालकों को किसी स्तर पर संरक्षण प्राप्त है?

उपभोक्ताओं की मजबूरी

विकल्पहीनता का संकट

स्थानीय उपभोक्ताओं की स्थिति बेहद दयनीय है उन्हें मजबूरी में इन्हीं एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ता है जहां समय पर सिलेंडर नहीं मिलता ब्लैक में महंगे दाम पर खरीदना पड़ता है कम गैस मिलने की शिकायत आम है

उपभोक्ता चाहते हुए भी कोई ठोस शिकायत नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें डर रहता है कि अगली बार उन्हें और भी ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ेगी

बड़ा सवाल क्या होगी कार्यवाही.?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संबंधित विभाग और Indian Oil Corporation इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करेंगे?

या फिर यह शोषण भ्रष्टाचार और उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी का खेल यूं ही चलता रहेगा?

यह मामला केवल एक इलाके की समस्या नहीं है बल्कि यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है—जहां नियम किताबों में हैं लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है

: – ललित भसोढ़

: – बातें कही अनकही दिल्ली

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