श्री बाबूराम सोलंकी जनसेवा, ईमानदारी और संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी

श्री बाबूराम सोलंकी जनसेवा, ईमानदारी और संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी

जानिए श्री बाबूराम सोलंकी के जीवन की प्रेरणादायक गाथा गांधी-नेहरू विचारधारा से प्रेरित एक सच्चे जनसेवक जिन्होंने नबी करीम से महानगर परिषद तक जनता के दिलों में अपनी अमिट छाप छोड़ी

श्री बाबूराम सोलंकी जनसेवा ईमानदारी और संघर्ष का अद्वितीय प्रतीक

परिचय :- एक ऐसा नाम जो समय के साथ और चमकता गया

दिल्ली की राजनीति और जनसेवा के इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो समय के साथ धुंधले नहीं पड़ते बल्कि और अधिक प्रेरणादायक बनते जाते हैं श्री बाबूराम सोलंकी ऐसा ही एक व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपने कर्म,सादगी और समर्पण से समाज में एक अलग पहचान बनाई अनुसूचित जाति के जुलाहा / धानक समाज से आने वाले बाबूराम सोलंकी जी ने यह सिद्ध किया कि सच्ची लगन ईमानदारी और सेवा भावना किसी भी बाधा को पार कर सकती है उनका जीवन पूरी तरह जनहित को समर्पित रहा

गांधी-नेहरू विचारधारा से प्रेरित राजनीतिक शुरुआत

बाबूराम सोलंकी जी गांधी-नेहरू विचारधारा के प्रबल समर्थक थे इसी विचारधारा से प्रेरित होकर उन्होंने कांग्रेस पार्टी को चुना और जनसेवा के मार्ग पर आगे बढ़े राजनीति में आने से पहले वे भारतीय रेलवे में कार्यरत थे लेकिन उनका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं बल्कि समाज के लिए कुछ करना था उनकी निष्ठा को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने स्वयं उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया

नबी करीम से महानगर परिषद तक का सफर

वर्ष 1971 में नबी करीम क्षेत्र से नगर पार्षद चुने जाने के साथ उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई इसके बाद 1977 और 1983 में वे दो बार महानगर पार्षद बने

यह केवल चुनावी जीत नहीं थी बल्कि जनता के अटूट विश्वास और उनके कार्यों की स्वीकृति का प्रमाण था उन्होंने अपने अंतिम समय तक कांग्रेस पार्टी का दामन थामे रखा

1977 - कठिन दौर में भी अडिग नेतृत्व

1977 का समय भारतीय राजनीति के लिए चुनौतीपूर्ण था जब पूरे देश में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा तब भी बाबूराम सोलंकी जी ने रामनगर दिल्ली से जीत दर्ज की

यह जीत इस बात का प्रमाण थी कि उनका जनता से गहरा जुड़ाव और विश्वास अटूट था

Bahu Ram Solanki with PM Indra Gandhi

जनसेवा और संघर्ष की मिसाल

महानगर परिषद में उन्होंने चीफ व्हिप के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाया और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष पद पर भी कार्य किया

शिक्षकों के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा इस आंदोलन के दौरान वे जेल भी गए और वह भी इंदिरा गांधी जी के साथ यह उनके साहस और सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक है

जमीनी स्तर पर विकास के ठोस कार्य

बाबूराम सोलंकी जी केवल विचारों के नेता नहीं थे बल्कि धरातल पर काम करने वाले जनप्रतिनिधि थे उनके प्रयासों से कुतुब रोड पर 035, 110 और 19 नंबर की DTC बस सेवाएं शुरू हुईं इस पहल से रामनगर, नबी करीम और आसपास के हजारों लोगों को बड़ी राहत मिली और क्षेत्र के विकास को नई गति मिली

व्यक्तित्व और मजबूत राजनीतिक संबंध

उनका व्यक्तित्व बेहद सरल सहज और मिलनसार था यही कारण था कि उनके संबंध कांग्रेस के कई बड़े नेताओं से अत्यंत आत्मीय थे दिल्ली के शेर कहे जाने वाले एच.के.एल. भगत से उनकी विशेष मित्रता थी तो वहीं श्रीमती शीला दीक्षित उन्हें अपने भाई का दर्जा देती थीं

निधन के बाद भी जीवित विरासत

सन 2001 में उनके निधन के बाद भी उनके कार्य लोगों के दिलों में जीवित हैं उनके सम्मान में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पुल से लेकर रामनगर,नबी करीम, सदर बाजार और कुतुब रोड मिठाई पुल तक की सड़क का नाम “बाबूराम सोलंकी मार्ग” रखा गया 16 फरवरी 2005 को इस मार्ग का लोकार्पण किया गया जो आज भी उनके योगदान की याद दिलाता है

उनकी अंतिम यात्रा में कांग्रेस के लगभग सभी वरिष्ठ नेता उपस्थित हुए यह उनके प्रति सम्मान का प्रमाण है 

एक जीवन जो प्रेरणा बन गया

श्री बाबूराम सोलंकी का जीवन हमें यह सिखाता है कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं बल्कि समाज सेवा का सशक्त मार्ग है

आज भी “बाबूराम सोलंकी मार्ग” का नाम हमें ईमानदारी संघर्ष और निस्वार्थ सेवा की याद दिलाता है उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक दीपक हैं

( यह ब्लॉग स्व श्री बाबू राम सोलंकी जी के परिवार के सदस्यों से मिली जानकारी पर आधारित है )

:- ललित भसोढ़

:- बातें कही अनकही,दिल्ली‌

2 thoughts on “श्री बाबूराम सोलंकी जनसेवा, ईमानदारी और संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी”

  1. श्री मान बाबू राम सोलंकी जी को मैंने भी बहुत करीब से देखा हैं मैं राम नगर और किरोड़ी मल स्कूल का छात्र रहा हूँ कई बार स्कूल से सम्बंधित दस्तावेज अटैस किये हैं बहुत ही सहज स्वभाव का यक्तित्व था मैं ऐसी हस्ती को बार बार नमन करता हूँ जय भीम जय धानका 🙏🙏🌹🌹🙏🙏

    1. Suresh Solanki

      जहां तक राजनीति में सेवा भाव के बारे में कहा जाता है स्वर्गीय श्री बाबू राम सोलंकी, उस पर सौ प्रतिशत खरे उतरे। ईमानदारी से काम करके उन्होंने एक मिसाल कायम की। MCD और दिल्ली प्रशासन के भ्रष्ट अधिकारी उनसे घबराते थे, चाहे वो थाने के SHO हो या अन्य कोई।
      नबी करीम एक अत्यंत पिछड़ा तथा गरीब निवासियों का इलाका हुआ करता था। इस इलाके के ज्यादातर लोग शौच के लिए रेलवे की जमी पर जाया करते थे लोगों की समस्याओं तथा उनके स्वस्थ को ध्यान में रखते हुए श्रीमान बाबूराम सोलंकी जी ही ने इस इलाके के घर-घर में सरकारी खर्चे एक शौचालय बनवाया, जो कि अत्यंत ही सराहा गया तथा परिणाम भी अच्छे निकले।

      सौभाग्य से वो मेरे ताऊजी हुआ करते थे, जिनपर हम बहुत-बहुत हर्ष वा गुमान करते है।
      सुरेश सोलंकी
      सुपुत्र स्वर्गीय डॉ मनोहर लाल सोलंकी

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top