BRICS में भारत की बड़ी जीत! मायावती, उमर अब्दुल्ला और सिब्बल ने भी सराहा मोदी सरकार का नेतृत्व

ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक सक्रियता और नेतृत्व को लेकर सरकार के समर्थकों के साथ-साथ कुछ विपक्षी नेताओं की सकारात्मक टिप्पणियां भी सामने आईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच साझा घोषणापत्र पर सहमति बनी और आतंकवाद तथा क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म की निंदा की गई। समर्थकों ने इसे भारत की विदेश नीति की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी पहलगाम आतंकी हमले की घोषणापत्र में निंदा को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, इतने विविध हितों वाले देशों के बीच किसी मुद्दे पर साझा सहमति बनना अपने आप में उल्लेखनीय है।

पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने भी सम्मेलन में सभी आमंत्रित देशों के राष्ट्राध्यक्षों की भागीदारी और संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति को सकारात्मक बताया। उन्होंने विशेष रूप से चीन के राष्ट्रपति और रूस के राष्ट्रपति की मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना।

पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने भी कहा कि ब्रिक्स जैसे विविध देशों के समूह में साझा प्रस्ताव पर सहमति बनाना आसान नहीं होता। उनके मुताबिक, ऐसे मतभेदों के बावजूद संयुक्त बयान पारित होना सरकार के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती सहित कुछ अन्य विपक्षी नेताओं की टिप्पणियों को भी सरकार के समर्थकों ने इसी संदर्भ में पेश किया है। उनका तर्क है कि राजनीति में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के हितों से जुड़े मुद्दों पर उपलब्धियों को स्वीकार करना भी जरूरी है।

ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर सरकार के समर्थकों और आलोचकों के बीच मतभेद अपनी जगह हैं। लेकिन सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच सहमति बनना, प्रमुख नेताओं की भागीदारी और आतंकवाद के मुद्दे पर साझा रुख सामने आना भारत की कूटनीतिक गतिविधियों के प्रमुख पहलुओं में शामिल रहे।

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