दिल्ली में आजकल एक नई तरह का ट्रैफिक नियम लागू हो गया है
पहले वीआईपी बाकी देख लेंगे
यह नियम सड़क पर भी चलता है और सरकारी दफ्तरों में भी
मान लीजिए आपको पानी का मीटर लगवाना है
आप आम आदमी हैं अधिकारियों का जवाब होगा
अभी तो पाइपलाइन मंजूरी के लिए फाइल में घूम रही है
लेकिन वीआईपी को वही पाइपलाइन हवा में उड़ा कर सीधा घर तक पहुंचा दी जाएगी और अधिकारी गर्व से कहेंगे
देखिए सर हमने आपको पानी से पहले मीटर दे दिया
पासपोर्ट बनवाने गए ?
आम आदमी सिस्टम डाउन है कल आइए
वीआईपी सर सिस्टम आपके लिए अपग्रेड कर दिया है पासपोर्ट के साथ चाय या कॉफी ?
बिजली का बिल गलत आ गया ?
आम आदमी फॉर्म भरिए रसीद लगाइए तीन महीने बाद सुधरेगा
वीआईपी सर नया बिल आपके व्हाट्सएप पर भेज दिया है पुराना वाला डिलीट कर दीजिए
यहां तक कि अस्पताल में भी नियम वही है “ललित”
आम आदमी का नंबर बुलाने तक वह खुद ठीक हो जाए
और वीआईपी का नंबर आते ही डॉक्टर भी खड़े होकर कहते हैं
सर आपको देखकर हमें भी हिम्मत आ गई
कभी-कभी सोचता हूं अगर मैं भी वीआईपी होता तो
मेरे मोहल्ले की टूटी सड़क अगले चुनाव का इंतज़ार न करती
बिजली वाले बिल में मेरी गलती खुद-ब-खुद सुधर जाती
और डाकिया भी मेरे घर आकर कहता
सर चिट्ठी तो नहीं आई पर हालचाल लेने चला आया
लेकिन अफसोस…मैं आम आदमी हूं
जिसकी पहचान सिर्फ इतनी है कि उसकी पहचान कहीं दर्ज ही नहीं है
ललित भसोढ़ “रुद”
बातें कहीं अनकहीं,दिल्ली
