बच्चों का ब्लड प्रेशर उनकी उम्र, लंबाई और लिंग के अनुसार अलग होता है। मोटापा, किडनी की बीमारी और खराब जीवनशैली हाई बीपी का जोखिम बढ़ा सकते हैं। तीन साल से अधिक उम्र के बच्चों का बीपी नियमित रूप से जांचना जरूरी है। लगातार बढ़ी रीडिंग आने पर डॉक्टर से सलाह लें।
हाई ब्लड प्रेशर को सेहत के लिए सबसे खतरनाक स्वास्थ्य स्थितियों में से एक माना जाता है। अगर इसे कंट्रोल न किया जाए तो इससे दिल की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। ये भी माना जाता रहा है कि ब्लड प्रेशर की दिक्कत सिर्फ वयस्कों और बुजुर्गों को होती है, पर असलियत ये है कि बच्चे भी इस समस्या का शिकार हो सकते हैं।
पिछले दो दशकों में, 19 साल से कम उम्र के बच्चों और किशोरों में हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के मामले लगभग दोगुने हो गए हैं। साल 2000 में यह दर लगभग 3% थी, जो 2020 तक बढ़कर 6% से अधिक हो गई है। वर्तमान में दुनिया भर में लगभग 11.4 करोड़ युवा इससे प्रभावित हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बच्चों में मोटापा, शारीरिक गतिविधियों की कमी, खानपान की गड़बड़ी और कुछ बीमारियों के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा देखा जा रहा है। परेशानी की बात यह है कि कई बच्चों में हाई बीपी के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में माता-पिता को पता ही नहीं चलता कि बच्चे को ये दिक्कत तो नहीं? कहीं आपका बच्चा भी तो इसका शिकार नहीं है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं बच्चों का ब्लड प्रेशर उनकी उम्र, लंबाई और लिंग के हिसाब से अलग हो सकता है। इसलिए बड़ों के लिए इस्तेमाल होने वाली सामान्य रीडिंग से बच्चों का बीपी नहीं मानना चाहिए।
बच्चों का ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए?
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक छोटे बच्चों में सामान्य बीपी की रीडिंग किशोरों से अलग होती है। इसलिए सभी बच्चों के लिए 120/80 को सामान्य मानना सही नहीं है। 1 से 13 वर्ष की आयु के बच्चों की रीडिंग 90mmHg से कम होनी चाहिए।
नवजात शिशुओं का औसत बीपी लगभग 64/41 mmHg होता है।
3 से 6 महीने: लगभग 70-90 / 50-65 mmHg
6 से 12 महीने: लगभग 80-100 / 55-65 mmHg
1 से 3 साल: लगभग 90-105 / 55-70 mmHg
3 से 6 साल: लगभग 95-110 / 60-75 mmHg
6 से 12 साल: लगभग 100-120 / 60-75 mmHg
13 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए सामान्य बीपी 120/80 से कम माना जाता है।
बच्चों में हाई बीपी होने की दिक्कत क्यों होती है?
बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सामान्य तौर पर अधिक वजन, ज्यादा नमक वाला खाना खाना, नियमित व्यायाम की कमी और परिवार में हाई बीपी की हिस्ट्री बच्चों के जोखिमों को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा किडनी की बीमारी, हृदय की कुछ समस्याएं, हार्मोन संबंधी गड़बड़ियां और कुछ दवाएं भी इसकी वजह बन सकती हैं।
खास बात यह है कि छोटे बच्चों में हाई बीपी होने पर किसी अंदरूनी बीमारी के खतरों पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है।
इसे केवल मोटापे या खानपान के कारण होने वाली समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
