दिल्ली… केवल भारत की राजधानी नहीं बल्कि सदियों की सभ्यता,संस्कृति और संघर्ष का जीवंत ग्रंथ है यहां हर गली एक कहानी कहती है हर इमारत अपने भीतर इतिहास की सांसें समेटे खड़ी है और हर चेहरा बदलते समय का साक्षी है “बातें कही अनकही दिल्ली” उसी धड़कती हुई दिल्ली की आवाज़ है जहां अतीत,वर्तमान और भविष्य एक साथ संवाद करते हैं यह मंच दिल्ली के धार्मिक स्थलों की आस्था,ऐतिहासिक धरोहरों की गरिमा,विविध संस्कृतियों की रंगत और राजनीतिक परिदृश्य की सच्चाइयों को एक साथ समेटने का प्रयास है मंदिरों की घंटियों से लेकर मस्जिदों की अज़ान,गुरुद्वारों की सेवा भावना से लेकर चर्चों की शांति तक यहां आस्था का अद्भुत संगम दिखाई देता है साथ ही किलों,हवेलियों,पुरानी इमारतों और भूली-बिसरी धरोहरों में छिपा लुप्त-सुप्त इतिहास हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है
दिल्ली की संस्कृति केवल त्योहारों और खान-पान तक सीमित नहीं बल्कि यह सह-अस्तित्व,संघर्ष,संवाद और परिवर्तन की सतत यात्रा है राजनीति के उतार-चढ़ाव, जन आंदोलनों की गूंज और लोकतंत्र की धड़कन भी इसी शहर में स्पष्ट सुनाई देती है “बातें कही अनकही दिल्ली” का उद्देश्य केवल स्मृतियों को दोहराना नहीं बल्कि उस विरासत को संजोए रखना है जो धीरे-धीरे समय की धूल में दबती जा रही है क्योंकि दिल्ली को समझना दरअसल भारत की आत्मा को समझना है जहां कही और अनकही दोनों ही बातें हमारी पहचान बनाती हैं।
:- ललित भसोढ़
:- बातें कही अनकही,दिल्ली
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