दिल्ली का अंतिम द्वार
निगमबोध घाट का बदलता स्वरूप…
दिल्ली के हृदय में स्थित निगमबोध घाट न केवल एक श्मशान स्थल है बल्कि यह एक ऐसा धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है जहां जीवन की अंतिम यात्रा मोक्ष की कामना और आधुनिक व्यवस्था की चुनौतियां एक साथ दिखाई देती हैं यमुना तट पर स्थित यह घाट दिल्ली का सबसे बड़ा और सबसे व्यस्त श्मशान घाट है जहाँ प्रतिदिन दर्जनों अंतिम संस्कार संपन्न होते हैं
पौराणिक महत्त्व से ऐतिहासिक पहचान तक
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार यह वही स्थान है जहां भगवान ब्रह्मा ने यमुना में स्नान कर वेदों का स्मरण किया था इसी कारण इसका नाम पड़ा निगमबोध महाभारत युग में राजा युधिष्ठिर द्वारा इसकी स्थापना की बात भी कही जाती है यह घाट आत्मा की शांति और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है
सबसे बड़ा और सबसे व्यस्त घाट
निगमबोध घाट दिल्ली ही नहीं पूरे उत्तर भारत के सबसे अधिक उपयोग में आने वाले श्मशान स्थलों में गिना जाता है औसतन प्रतिदिन 50–60 शवों का अंतिम संस्कार यहां किया जाता है विशेष परिस्थितियों में जैसे गर्मी की लहर या महामारी के समय यह संख्या तीन गुना तक बढ़ जाती है वर्ष 2024 की गर्मियों में केवल चार दिनों में 435 अंतिम संस्कार यहाँ संपन्न हुए थे
आधुनिकता की ओर बढ़ते कदम
यह घाट अब परंपरा और तकनीक का संगम बन चुका है दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा संचालित इस स्थल पर इलेक्ट्रिक शवदाह गृह (1954 से), CNG आधारित दाह गृह,पूजा एवं प्रतीक्षा कक्ष,अस्थि बैंक, आर.ओ.जल, और पर्यावरण अनुकूल ग्रीन वेस्ट प्रोसेसर जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं
अव्यवस्थाओं पर उठते सवाल
हालांकि व्यवस्थागत खामियां भी इस मोक्षस्थल की गरिमा को प्रभावित कर रही हैं नवंबर 2023 में दिल्ली की महापौर शैली ओबेरॉय के औचक निरीक्षण में पाया गया कि
VIP अंतिम संस्कार के नाम पर हजारों रुपये तक की अवैध वसूली हो रही थी
नियमों के विरुद्ध पीपल की लकड़ी का उपयोग किया जा रहा था
मृतकों के नाम की पट्टिका लगाने के लिए भी भारी धनराशि मांगी जा रही थी
इन मामलों की जांच के आदेश जारी किए गए हैं
श्रद्धा और व्यवस्था का द्वंद्व
जहाँ एक ओर यह घाट मोक्ष और श्रद्धा का केंद्र है वहीं दूसरी ओर अव्यवस्था और पारदर्शिता की कमी कई बार आम जनमानस को परेशान करती है प्रशासन द्वारा डिजिटल समाधान निगरानी कैमरे और शुल्क निर्धारण जैसी योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है
निगमबोध घाट न केवल जीवन की अंतिम यात्रा का पड़ाव है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक आध्यात्मिक और प्रशासनिक अनुभव का केंद्र भी है दिल्ली का यह अंतिम द्वार यदि पूर्ण पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ संचालित हो तो यह न केवल एक आदर्श श्मशान स्थल बन सकता है बल्कि देशभर के लिए एक उदाहरण भी प्रस्तुत कर सकता है
ललित भसोढ़ ‘रूद्र’
बातें कही अनकही दिल्ली
